नरेन्द्र कोहली के लेखन का विकास उनकी कहानियों के माध्यम से हुआ। उन्होंने अपनी कहानियों के विषयों को आस-पड़ोस से उठाया है। अधिकांश कहानियां आत्मकेंद्रित भी दिखाई देती हैं। इसलिए ये कहानियां आपको अपने से पुनः परिचित कराती दिखाई देंगी। अपनी कथाओं के माध्यम से उन्होंने विसंगतियों और दोहरे मानदंडों पर प्रहार किया है। और कहीं-कहीं अपने विद्रोह की घोषणा भी की है। नरेन्द्र कोहली आज एक प्रतिष्ठित और स्थापित उपन्यासकार हैं लेकिन उन्होंने यह सोपान कहानी के माध्यम से ही प्राप्त किया है।