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About The Book
Description
Author
समाजशास्त्री की डायरी- एक जीवन यात्रा का प्रतिबिंब और एक देश की बदलती तस्वीर का दस्तावेज़।यह पुस्तक मात्र एक आत्मकथा नहीं बल्कि दो समानांतर कहानियों की सजीव अभिव्यक्ति है: एक समाजशास्त्री की 80 वर्षों की निजी स्मृतियों की यात्रा और दूसरी आज़ादी के बाद के भारत के सामाजिक बदलावों की गाथा। गाँव संयुक्त परिवार और गंवई संस्कृति की विलुप्त होती परंपराएँ इस दास्तान में जीवंत हो उठती हैं।यह डायरी यथार्थ और अनुभवों की उस नदी की तरह है जिसमें कहीं आत्मकथात्मक धाराएँ बहती हैं तो कहीं लघुकथाओं की छायाएँ झलकती हैं। इसमें 'फील्डवर्क' के वो अनुभव हैं जिन्होंने लेखक को सामाजिक ताने-बाने को गहराई से समझने का अवसर दिया।पूर्वाग्रह से मुक्त भावनाओं से युक्त और सामाजिक सच्चाइयों से साक्षात्कार करती यह कृति बदलाव की थीम को आत्मसात करती है। नई पीढ़ी के लिए न केवल स्मृतियों का संग्रह हैबल्कि बदलते भारत की एक संवेदनशील और सजीव झलक भी है।समाजशास्त्री की डायरी- वंचित समाजों के द्वीपों से गुजरती हुई एक ईमानदार यात्रा।