Samakaaleen Kavita Aur Apanee Keval Dhaar


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About The Book

समकालीन कविता में पारंपरिक विचारों और रचनाओं से अलग हटकर मनुष्य की समस्याओं और उसका अपने परिवेश के साथ लगाव का स्वर सुनाई देता हैं। समकालीन कवि अपने परिवेश प्रकृति और संबंधों के प्रति संवेदनशील हैं वह अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के प्रति अपनी संबद्धता और प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता हैं वह वर्तमान समस्याओं के प्रति चिंता प्रकट करता हैं और उसे अतीत की घटनाओं के साथ जोड़कर उसका समाधान अतीत की घटनाओं में खोजता हैं। समकालीन कवियों में अरुण कमल का विशेष स्थान हैं अरुण कमल की रचनाओं में समकालीन मनुष्य की भावनाओं और संवेदनाओं का बिंबात्मक यथार्थ चित्रण हुआ हैं। उनका काव्य संग्रह अपनी केवल धार इस दृष्टि से विशेष उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा उनका 'सबूत' 'नए इलाके में' 'पुतली में संसार' 'मैं वो शंख महाशंख' 'योगफल' शीर्षक से काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका हैं। 'अपनी केवल धार' काव्य संग्रह में उन्होंने समाज के साथ अपने जुड़ाव का यथार्थ चित्रण किया हैं उनकी समाज के प्रति भावना उनके इस पंक्ति के साथ स्पष्ट हो जाती हैं - अपना क्या है इस जीवन में सब तो लिया उधार सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार। इस पुस्तक में समकालीन कविता के संदर्भ में अरुण कमल के काव्य संग्रह 'अपनी केवल धार' का विश्लेषण किया गया हैं। यह पुस्तक समकालीन कविता के विद्यार्थियों और जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी हैं।
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