कल आज और कल के बीच जो फर्क है वही एक काल विशेष का सच है। ‘समय से संवाद करता युग’ लंबी-कविता का आग्रह उस सच को जीना और स्वीकार करना है जिसे हमने अब तक जिया सुना समझा। हम सभी बीत रहे समय का प्रमाण हैं प्रस्तर हैं। हमारा भविष्य हमारी चिंताएँ युग सापेक्ष हैं। यह दुनिया युद्ध और अवसाद से टूट रही है। वजह आदमी जब टूटेगा यह दुनिया कहाँ से बचेगी? मेरा कविता-कर्म उस दुनिया को उस आदमी को बचाना है जिससे यह और खूबसूरत बनी हुई है सार्थक बनी हुई है। जेहन में बहुत सारी बातें विचार और दृश्य रोज आते जाते हैं हम उन्हें आम समझ कर अक्सर भूल जाते हैं किंतु वह अपने आप में मेरे लिए आपके लिए और इस दुनिया के लिए खास महत्व रखते हैं। यह दुनिया यह कविता उन्हीं से निर्मित है। जहाँ आप सरगोशी करते हैं कहते हैं सुनते हँसते हैं और रोते हैं।
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