संभोग से समाधि की ओर भाग-3 : नारी और क्रान्ति-: जो पुराना है वह जाएगा। जो मृत है यह गिरेगा क्योंकि धर्मयुद्ध छेड़ दिया है ओशो से और यह धर्मयुद्ध धर्म की जीत तक की स्थापना तक चलने वाला है। यह युद्ध कोई दो देशों के बीच का युद्ध नहीं है कि इसमें कोई समझौता हो जाए। यह तो अंत तक चलने वाला है और अंततः धर्म जोगा सत्य जीनेगा यह संन्यासी योद्धा जी यह तय है। इस धर्मयुद्ध को छिड़े करीब बीस वर्ष बीत गए हैं इस तरह हिसाब लगाते हैं तो कभी-कभी दुचिता होती है कि अबतक तो लगभग आधी मनुष्यता को खबर लग जानी चाहिए थी कि यह सो हमारा नहीं बल्कि परम मित्र है। यह हमारी बेड़िया है। इस खबर के न लगने से बड़ा अहित हुआ काटने वालाहै। मनुष्य जाति के इस अहित के लिए जिम्मेदार हैं वे लोग जो संचारझुक आयी बदरिया सावन की-: मीरा को तर्क और बुद्धि से मत सुनना। मीरा का कुछ तर्क और बुद्धि से लेना-देना नहीं है। मीरा को भाव से सुनना भत्तिफ़ से सुनना श्रद्धा की आंख से देखना। हटा दो तर्क इत्यादि को किनारे सरका कर रख दो। थोड़ी देर के लिए मीरा के साथ पागल हो जाओ। यह मस्तों की दुनिया है। यह प्रेमियों की दुनिया है। तो ही तुम समझ पाओगे अन्यथा चूक जाओगे।