शिव क्या हैं शिवलिंग किसका प्रतीक है। बहुत सारी कहानियाँ और किस्से इससे जुड़े हैं और इन सभी दृष्टिकोणों का मैं पूरी तरह सम्मान भी करता हूँ मेरे लिए शिव कोई प्रलय के देवता नहीं हैं और न ही मैं यह मानता हूँ कि तमस ही उनकी प्रकृति है। मेरा मानना है कि शिव सत्व और तमस दोनों के बीच में एक सेतुरूप हैं जिस पर ही ब्रह्मांड और इसके सभी स्वरूपों और गुणों का निर्माण हुआ है। शिव ही वह संतुलन हैं जिनकी अपनी समाधि से जागने पर अर्थात असंतुलित होने पर संसार भंग हो जाता है इस तरह ब्रह्मांड ही शिव है और शिव ही ब्रह्मांड है। सभी तत्त्व भी जब तक ही दृश्यमान हैं जब तक वह साम्य में हैं। साम्य की अवस्था ही उन्हें सम्यक बनाती है इस प्रकार धरती आकाश का कण कण सम्यक है शिव है शिवलिंग सम्यक की उस दशा का ही प्रकटीकरण है जिसमें ऊर्जा की दो अवस्था और उनके बीच की साम्य अवस्था को बताया है। पुस्तक भी इसी अवधारणा को लेकर चलती है।
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