Sanidhya: Kuchh Pass Kuchh Door
Hindi

About The Book

जब जीवन बहुत दूर चल चुका होता है तो हर कोई एक बार अनायास ही पीछे मुड़ कर देखता है। उसे अतीत का रंगमंच आँखों में दिखता है फिर वहीं लौट जाने की आशा तन-मन झखझोर देती है। साथ-साथ पथ पर आगे बढ़ते पग और पीछे खींचती माया जीवन को दुविधा में डाल देती है। इस काव्य संकलन की अठारह रचनाओं में जीवन उभर कर आता है। इस संग्रह की रचनाओं में सौन्दर्य है प्रणय है और विरक्ति भी है। नवरसों के कुछ भाव सामान्यतः आम जीवन में उभरते हैं। उन्हे देखने-समझने का अपना-अपना दृष्टिकोण है। इस संकलन मे कहीं आसक्ति कहीं आह कभी अनुबंध या फिर अवसान तक बात चली जाती है... जो भी हो जीवन एक है अस्तित्व एक है सानिध्य के आभास अनेक हैं।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.
downArrow

Details


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE