जब जीवन बहुत दूर चल चुका होता है तो हर कोई एक बार अनायास ही पीछे मुड़ कर देखता है। उसे अतीत का रंगमंच आँखों में दिखता है फिर वहीं लौट जाने की आशा तन-मन झखझोर देती है। साथ-साथ पथ पर आगे बढ़ते पग और पीछे खींचती माया जीवन को दुविधा में डाल देती है। इस काव्य संकलन की अठारह रचनाओं में जीवन उभर कर आता है। इस संग्रह की रचनाओं में सौन्दर्य है प्रणय है और विरक्ति भी है। नवरसों के कुछ भाव सामान्यतः आम जीवन में उभरते हैं। उन्हे देखने-समझने का अपना-अपना दृष्टिकोण है। इस संकलन मे कहीं आसक्ति कहीं आह कभी अनुबंध या फिर अवसान तक बात चली जाती है... जो भी हो जीवन एक है अस्तित्व एक है सानिध्य के आभास अनेक हैं।
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