Sansad Se Sarak Tak
shared
This Book is Out of Stock!


*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

304
395
23% OFF
Hardback
Out Of Stock
All inclusive*

About The Book

धूमिल मात्र अनुभूति के नहीं विचार के भी कवि हैं। उनके यहाँ अनुभूतिपरकता और विचारशीलता इतिहास और समझ एक-दूसरे से घुले-मिले हैं और उनकी कविता केवल भावात्मक स्तर पर नहीं बल्कि बौद्धिक स्तर पर भी सक्रिय होती है। धूमिल ऐसे युवा कवि हैं जो उत्तरदायी ढंग से अपनी भाषा और फार्म को संयोजित करते हैं। धूमिल की दायित्व-भावना का एक और पक्ष उनका स्त्री की भयावह लेकिन समकालीन रूढि़ से मुक्त रहना है। मसलन स्त्री को लेकर लिखी गई उनकी कविता ‘उस औरत की बगल में लेटकर’ में किसी तरह का आत्मप्रदर्शन जो इस ढंग से युवा कविताओं की लगभग एकमात्र चारित्रिक विशेषता है नहीं है बल्कि एक ठोस मा नव स्थिति की जटिल गहराइयों में खोज और टटोल है जिसमें दिखाऊ आत्महीनता के बजाय अपनी ऐसी पहचान है जिसे आत्म-साक्षात्कार कहा जा सकता है। उत्तरदायी होने के साथ धूमिल में गहरा आत्मविश्वास भी है जो रचनात्मक उत्तेजना और समझ के घुले-मिले रहने से आता है और जिसके रहते वे रचनात्मक सामग्री का स्फूर्त लेकिन सार्थक नियंत्रण कर पाते हैं। यह आत्मविश्वास उन अछूते विषयों के चुनाव में भी प्रकट होता है जो धूमिल अपनी कविताओं के लिए चुनते हैं। ‘मोचीराम’ ‘राजकमल चौधरी के लिए’ ‘अकाल-दर्शन’ ‘गाँव’ ‘प्रौढ़ शिक्षा’ आदि कविताएँ जैसा कि शीर्षकों से भी आभास मिलता है युवा कविता के सन्दर्भ में एकदम ताज़ा बल्कि कभी-कभी तो अप्रत्याशित भी लगती हैं। इन विषयों में धूमिल जो काव्य-संसार बसाते हैं वह हाशिए की दुनिया नहीं बीच की दुनिया है। यह दुनिया जीवित और पहचाने जा सकनेवाले समकालीन मानव-चरित्रों की दुनिया है जो अपने ठोस रूप-रंगों और अपने चारित्रिक मुहावरों में धूमिल के यहाँ उजागर होती है।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details