कविता की दुनिया में यश और नाम के लिए बहुत मारामारी रही है पर मैं इससे बचा रहा हूँ। मैं हमेशा मानता हूँ कविता की एकमात्र कसौटी जीवन है। मैं कविता की दुनिया में भी द्वंद्वरहित नहीं रह सकता। वहाँ भी ‘कविता बनाम कविता’ का टकराव रहेगा। मुझे उन आँखो से प्यार है जिनके भीतर दुनिया को बदलने का कुछ भी सपना है। घर जारकर बाजार में लाठी लेकर घूमने वाले कबीरों उन नौजवानों जिनके अरमान खिलने ही पहले ही मुरझा जाते हैं वह रूमानियत जो बहुत जल्दी दफ्रन हो जाती है उनको अपनी कविता में जगह देना चाहता हूँ।