यह उपन्यास सपनो का बोझ वर्तमान में बच्चों के तनावपूर्ण जीवन के ऊपर आधारित है कि कैसे परिवारों में एक ही बच्चे के ऊपर माता-पिता अपने सपनो का बोझ डाल देते है। इसका हरजाना बच्चे को ही नहीं भुगतना पड़ता वरन बुढ़ापे में बच्चे के माता-पिता को भी अपने सपनो की कीमत चुकानी पड़ती है। उपन्यास में अभिभावकों के लिए एक सन्देश है कि बच्चे के सपनो को भी अहमियत दी जाये और उनको पूरा करने के लिए पूर्ण सहयोग किया जाये। अपने बच्चों को शर्तों पर आधारित जीवन जीने के लिए विवश न किया जाये। इसी में उनकी और अभिभावकों की भलाई है। |