प्रभु को जब वन हुआ मार्ग में उनके तुमने धोए होंगे चरण चढ़ाए होंगे नीलकमल तुम रोये थे न देख के प्रेम से भर-भर? बुद्ध ने भोजन किया था तो हाथ धोते सुना होगा तुमने उस करुण मुख को। तुमने देखा है लजा कर सुंदरतम रानियों को जब वो आती थी नहाने के लिए तुमने देखा है गर्व से जीते हुए राजा को भरे मन से रुधते हार गए माथे को.