सशक्त समाज का निर्माण: दिव्यांगजनों की भागीदारी दिव्यांगता केवल एक शारीरिक मानसिक या संवेदी स्थिति नहीं है बल्कि यह हमारे समाज की संवेदनशीलता सहानुभूति और समानता की परीक्षा है। यह पुस्तक दिव्यांगजनों के अधिकारों उनकी जरूरतों और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाने के प्रयासों का एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। दिव्यांगता का परिचय में न केवल उनके जीवन को प्रभावित करने वाले कानूनी शैक्षिक और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की गई है बल्कि पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए आवश्यक रणनीतियाँ भी शामिल की गई हैं। यह पुस्तक न केवल दिव्यांगजनों के लिए एक मार्गदर्शिका है बल्कि उन लोगों के लिए भी एक प्रेरणा है जो एक समावेशी समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। लेखक डॉ. शिवाजी कुमार इस पुस्तक के माध्यम से एक संवेदनशील और जागरूक समाज के निर्माण का आह्वान करते हैं। उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति चाहे उसकी स्थिति कुछ भी हो समान अवसर और गरिमा का हकदार है। आइए मिलकर सशक्तिकरण और समानता की इस यात्रा का हिस्सा बनें। लेखक: डॉ. शिवाजी कुमार एक समावेशी समाज के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध शोधकर्ता और मार्गदर्शक।