इस संग्रह की लघुकथाएं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई हैं और समाज में फैली विसंगतियों की ओर इशारा करती हैं। इन लघुकथाओं के माध्यम से राजनीति से लेकर टूटते व्यक्तिगत संबंधों और घोर भौतिकवादी के कारण उपजे अवसरवाद को व्यक्त करने की कोशिश की गई है। लघुकथाएं अपनी लघुता में व्यापकता धारण करती हैं । पेड़ जंगल पहाड़ जैसे प्राकृतिक बिंबों के माध्यम से भी लघुकथाओं को रचने का प्रयास किया गया है। इनके अलावा समाज की विद्रूपताओं को भी रेखांकित किया गया है संग्रह की लघुकथाओं में।