यह पुस्तक 'सत्य की खोज ' को क्यों पढ़ना चाहिए?आजकल की व्यस्त जिन्दगी में किसी के पास समय ही कहां है कि वह सोचे कि मैं क्या हूं? ईश्वर क्या है? यह संसार क्या है?। अगर कभी मन में यह प्रश्न उठते भी हैं तो उचित मार्गदर्शन नहीं मिलता। भारतीय सनातन संस्कृति का जो वेदांत दर्शन है उस पर आधारित यह पुस्तक ऐसे जिज्ञासुओं का पथप्रदर्शन कर सकती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर इसकी रचना की गई है। आप सभी अपने सनातन जीवन लक्ष्य की ओर अग्रसर हों अपने आप को पहचानें।इसी मंगल कामना के साथआपकाडा.बी.आर.गुप्ता