सौंधी केवल पुस्तक नहीं एक खुशबू एक एहसास है जो मेरे दिल की गहराइयों से निकली है। जैसे सौंधी सी मिट्टी की महक दिल को महका देती है वैसे हो ये कविताएं मेरे दिल को और मेरे जीवन को महकाती हैं । एक कवि या कवयित्री का अपनी कविताओं से एक भावनात्मक नाता जुड़ जाता है मेरी कविताएं भी मेरी सहेली सी हैं जो मुझे हर बार थाम लेती हैं जब में लड़खड़ाती हूं। मेरी काव्य यात्रा में मेरे परिवार का साथ तो रहा हो है बहुत से लोग और भी हैं जिन्होंने इस यात्रा को सुखद बनाया है। मिराकी नामक ऐप जहां मेरी प्रतिभा और निखरी को सहृदय आभार मेरी साथी लेखकों कवियों कवयित्रियों को भी हृदयस्थ आभार जिन्होंने पग पग पर मुझे प्रोत्साहित किया और बेहतर लिखने की प्रेरणा दी। मेरी सारी ऑनलाइन ऑफलाइन सहेलियों का आभार सदा मुझे आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देने को । About Author: मोनिका कपूर एक लेखिका एक कवयित्री एवं एक चित्रकार हैं रासायनिक विज्ञान में अभियांत्रिकी (BE Chemical Engineering )करने के बावजूद नौकरी ना कर अपना पूरा समय अपने घर और परिवार के लिए समर्पित करती हैं। फ़रीदाबाद के शांत नगर में एक संयुक्त परिवार में रहती हैं। उनके लिए रंग और शब्द ही जीवन है परंतु सर्वोपरि है उनका परिवार। अपने पति और दोनो बच्चों को अपने जीवन और लेखन की प्रेरणा मानती हैं । उनकी मानें तो शब्द कविताएँभाव उनके सच्चे मित्र हैं कभी वो स्वयं शब्दों को खोजती हैं कभी शब्द उन्हें खोज कर कविता में बदल जाते हैं। लेखन जहाँ उन्हें मन के विचारों को काग़ज़ पे उकेरने का मौक़ा देता है वहीं जीवन का एक अभिन्न अंग बन जीने की प्रेरणा भी।
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