यह पुस्तक प्राकृतिक परिदृश्य को प्रदर्शित करती है ना सिर्फ श्रावण के विभिन्न रूपों का वर्णन बल्कि बेटियों पर हुए विभिन्न अत्याचारों बलात्कारों पर हृदय की गहराइयों से वेदना प्रकट करती है आज यह प्रश्न है कि बेटियों नारी पर हो रहे अत्याचारों की आखिर सीमा कहां है? आखिर कब तक ऐसा ही चलेगा? लम्बे काल से नारी के संघर्षों की व्यथा कथा क्या कभी खत्म ना होगी? सत्ता और पूंजीवाद की सांठगांठ का खेल समाज के गरीब वर्ग को कब तक जलाता रहेगा?देशभक्ति के विचारों से ओतप्रोत यह काव्य संग्रह स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों की गाथा है कविताओं में न केवल प्रेम और बहारों का वर्णन है बल्कि क्रांतिकारी संघर्षों को व्यवहारिकता में अपना कर हम कैसे सत्ता और पूंजीवाद की सांठगांठ को तोड़कर चेतना का संचार कर समाज में समानता की कड़ी जोड़कर विश्व गुरु भारत को फिर से प्रतिष्ठित कर सकते है।