सारी रात लिखती रही तुझे सारी रात पढ़ता रहा तू मुझे ज़िंदगी फना हो जाये यूँ ही लिखते पढ़ते तमाम रात उसके इंतज़ार में नौवेल पढ़ते गुज़री हकीकत समझ सबको बताती फिरी कि रात उनसे मुलाकात हुई इंतज़ार का सबर मुझ में है जागने का हुनर मुझ में है बशर्ते तू रात आने का वादा निभाये