Shabari
Hindi


Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

About The Book

मैं मना करता रहा पर मेरा हठी मन मानने को तैयार नहीं समझ नहीं आ रहा था कि कैसे समझाऊँ उसे। आखिर उहापोह की स्थिति में जीत हठी मन की ही हुई। फिर क्या था ! चल पड़ी कलम पंक पालित भक्ति नायिका शबरी की ओर जिनका शब्द बीज बंजर मस्तिष्क पर कबके न पड़ गया था। शबरी राम की शबरी... बेर वाली शबरी.... आखिर जीत शबरी की ही हुई। क्या लिखूँ कैसे लिखूँ ! बंजर भूमि में बीज प्रस्फुटित भी नहीं हो रहा था। तना शाख डाली टहनी फूल पत्ते फल कब लगते... बस... सारा आलम जब सो जाता तब मेरी कलम जग जाती है। निचोड़कर मन मस्तिष्क से एक शब्द नया गढ़ जाती हजब सारा आलम सो जाता तब मेरी कलम जग जाती है।निचोड़ कर मन मस्तिष्क से एक शब्द नया गढ़ लाती है।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details