SHABDON KI ROSHNI MEIN (Poems)


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About The Book

कविता संग्रह - ‘शब्दों की रोशनी में’। यांत्रिकता शुष्कता या स्थूलता के बरअक्स आर्द्रता और जीवन द्रव्य भरी कविताएं। संग्रह की इन कविताओं में वह सब है जो प्रायः शुरुआती दौर की कविताओं में स्वाभाविक रूप से होता है। किशोर से युवा और युवा से परिपक्वता की ओर बढ़ते कदमों की पदचाप। बनते रास्तों की स्वाभाविक अनगढ़ता का अपना सौंदर्य भी। उमड़ते घुमड़ते भावजगत को शब्दों में पिरोने का प्रयास हैं ये कविताएं। ठीक ऐसे जैसे कोई नदी बहती चली जाती है अपने आवेग में। कहीं छोटे तो कहीं चौड़े पाट में पसरती हुई। कहीं तेज ढलान में तीव्र गति तो कहीं कुछ समतल में मंथर शांत बहती हुई। भावजगत का यही आवेग इन कविताओं का रूपाकार निर्धारित करता है। बल्कि भाषाई बनावट भी। इन कविताओं में उद्दाम प्रेमानुभूतियों का सौंदर्य है तो रिश्तों और सामाजिक विसंगत स्थितियों के प्रति पीड़ा और प्रतिकार भी। प्रेम की यहां अनुभूति स्मृति आकांक्षा जैसी अनेक छवियां या भंगिमाएं मौजूद हैं। इन कविताओं में कवयित्री शब्दहीन विलाप को शब्दों में ढालने की कोशिश करती है। अभावग्रस्त किसी नन्हें की भूऽ की कराह और किसानों मजदूरों के रुके हुए कंठों की भी कराह को सुनती और बुनती है अपनी कविता में। यहां स्मृतियों के खुशनुमा रंगों से बना कालीन है तो सपनों की उड़ान सहेजता खुला आसमान भी। सुख और सुकून में बाधक आसपास की यातनाएं हैं तो अपने ही भीतर परिवर्तित होती ऋतुओं की आहट भी। भावना संवेदना और करुणा इन कविताओं के प्रमुख घटक और कारक भी हैं। -आत्मा रंजन
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