यह पुस्तक जीवन के विभिन्न पड़ावों पर व्यक्ति और उसके भावनाओं को समेटती है। आप किसी के लिए एक समय पर बहुत महत्वपूर्ण होते हैं पर ज़रूरी नहीं है कि आप हमेशा उसके लिए उतने ही महत्वपूर्ण रहें। कोई व्यक्ति किसी समय पर आपसे बहुत सारा प्रेम कर सकता है पर यह ज़रूरी नहीं है कि वह आजीवन आपसे उतना ही प्यार करें। जब व्यक्ति के जीवन में ऐसे परिवर्तन आते हैं तो वह निराशा खिन्नता और उदासी के दौर से गुजरता है। काफी समय तक इस हालत में रहने के बाद उसे महसूस होता है कि वह अपनी पूरी ज़िन्दगी ऐसे नहीं गुज़ार सकता है। तमाम कोशिशों के बाद वह अपना आत्मविश्वास वापस पाता है। ज़िन्दगी को एक नए तरीके से सकारात्मक तरीके से देखना शुरू करता है। जब उसकी स्वयं की ज़िन्दगी इस मुकाम तक पहुँच जाती है कि वह जीवन में कुछ अच्छा करने लगता है तो वह समाज के बारे में भी सोचना शुरू करता है। वह समाज में चल रही चीजों से रु-ब-रु होता है और कई बार अपने स्तर पर उन सामाजिक समस्याओं के बारे में गंभीरता से सोचता है और उसमें सुधार लाने का प्रयास भी करता है। यह पुस्तक ज़िन्दगी के इन्हीं चार पड़ावों (Love Dejection Motivation Society) से सम्बंधित कविताओं का संकलन है।