‘शहीदों के गांव’ प्रायः वे जगहें हैं जिनका क्रांतिकारियों की स्मृतियों और उनके संघर्शों से सघन रिष्ता रहा है। मेरे साथ पाठक भी इस यात्रा पर चलकर मुक्ति-युद्ध की जीवंतता और उस रास्ते के खुददरेपन से परिचित हो सकेंगे जिसने 90 वर्श तक साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्श की इबारत को अपने लहू से लिखा। यह लिखावटें थोड़ी बेतरतीब हैं पर इतिहास की कड़ियों को जोड़ना किसी तरह कठिनाई भरा नहीं है। - सुधीर विद्यार्थी