शिक्षण ही वह प्रक्रिया है जो एक शिक्षक के व्यक्ति को प्रदर्शित करती है और उसकी छवि लोगों के बीच गढ़ती है।जिस शिक्षक का शिक्षण जितना प्रभावी होता है वह उतना ही लोकप्रिय भी होता है।जो शिक्षक अपने शिक्षण को समयानुसार परिवर्तित नही कर पाते वो पिछड़ जाते है।जब हर क्षेत्र में परिवर्तन हो रहे है जो शिक्षा का क्षेत्र अछूता कैसे रह सकता है।नित नए उपकरण तैयार हो रहे है जो शिक्षण प्रक्रिया की सहजसरल और उपलब्धि मूलक बना रहे है इसलिए आवश्यकता है कि शिक्षक इसको अपनाकर अपने शिक्षण में प्रभाव उत्पन्न करें। मूल्यांकन वह प्रक्रिया है जिसके आधार पर हम किसी छात्र के ज्ञान का आकलन करते हैं। मूल्यांकन के द्वारा ही छात्र की किसी विषय में कमियों उसकी किसी विषय के प्रति रूचि और उसकी प्रतिभा का आकलन किया जाता है।