शेख़ मुहम्मद इब्राहीम ''ज़ौक़'' उर्दू के प्रसिद्ध शायरों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 1789 में दिल्ली में हुआ था। वे अपने सरल और प्रभावशाली अंदाज़ के लिए जाने जाते थे। ज़ौक़ ने जीवन की सच्चाइयों नैतिकता और धार्मिकता को शायरी के माध्यम से अभिव्यक्त किया। वे मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद शायर थे और शाही दरबार में विशेष स्थान रखते थे। ज़ौक़ को विशेष रूप से क़सीदा लेखन में महारत प्राप्त थी। उनकी शायरी आमफ़हम भाषा में होती थी जिससे आम लोग भी उनसे आसानी से जुड़ पाते थे। वे शाह नसीर के शागिर्द थे लेकिन आगे चलकर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी शायरी में फ़ारसी और अरबी शब्दों का सुंदर उपयोग मिलता है। उनका निधन 1854 में हुआ। ज़ौक़ की साहित्यिक धरोहर आज भी उर्दू अदब का अहम हिस्सा मानी जाती है।