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About The Book
Description
Author
आदिकाल से मनुष्य प्रकृति एवं जीवन के विविध रूपों की अभिव्यक्ति शब्दों के माध्यम से करता आ रहा है फिर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए शेष रह जाता है-बहुत कुछ कहने को।प्रतिभा आर्य के प्रथम काव्य संग्रह भावों का कारवाॅं के पश्चात द्वितीय काव्य संग्रह शेष है सुधि पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत है। शेष हैकाव्य संग्रह में संकलित रचनाऍं यदि मन की सागर में भावों की एक तरंग भी उठाकर पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करती है तो यही इस कृति की सार्थकता होगी।साहित्यपीडिया का हार्दिक आभार कि उसके माध्यम से अपने मनोभावों को काव्य संग्रह के रूप में व्यक्त करने का अवसर मिला।