शीशों का मसीहा कौन यहाँ इस कृति में शाश्वत मूल्यों का विवेचन और विश्लेषण है। यथार्थ जमीन पर खड़े होकर ख्वाबों ख्यालो से पीठ फेर कर इन रचनाओं का सृजन किया गया है। इसमें इनके काल की परिस्थितियों और वातावरण का चित्रण प्रस्तुत करने का प्रयोग किया गया है। सारी रचनाएँ अलग-अलग मीटर की गेय है। तुकान्तता की दृष्टि से इनको स्वर लय और ताल में बाँध कर रखा गया है।