About the Book: शिवोहम अर्थात मैं शिव हूं। यह किताब शिवमय होने का मार्ग है। यह किताब हमे अपने अंदर बैठे ईश्वर की सत्य रूप से पूजा करना सिखाती है। मेरे सत्य अनुभव पर लिखी गई यह किताब ध्यान धर्म और अंतरिक रहस्यों के बारे में है। अध्यात्म रूपी अमृत पर यह मेरे अनुभव हैं। मेरी गुरु मां द्वारा दिया गए ज्ञान और प्रकाश को यह समर्पित है। सांसारिक दुनिया में ऐसे अनुभव प्राप्त करना मेरा सौभाग्य है और उन्हें लेखनी के माध्यम से सबके साथ किताब के रूप में सांझा करना महा पुण्य। मेरी ईश्वर से विनती है कि यह अनुभव ज्यादा से ज्यादा लोग स्वयं कर सकें। यह किताब ईश्वर को पहचानने की और अपनाने की एक नियमावली है। यह अनुभव ईश्वर के सानिध्य में रहने की एक झलक है।About the Author: इशिता शर्मा एक भारतीय आयु 13 वर्ष। पूर्ण आध्यात्मिक गुरु नीना शर्मा जी की शिष्या सनातन पद्धति की अनुयायी। गुरु शिष्य परंपरा में एक शिष्या होने का बेहद सौभाग्य मिला है। समाज में रहते-रहते आत्मिक और मानसिक स्तर पर गुरु की शरण में तपस्या से कर्मयोगी बनने की ओर। नर से नारायण बनने की यात्रा अर्थात आत्मा का परमात्मा में लीन होने की यात्रा में गुरु की शरण में एक शिष्या। मेरा परिचय शिष्या होने से ही है। वो भी एक दिन मिट जायेगा और केवल सत्य ईश्वर रहे जायेंगे।