आधुनिक ग़ज़ल शैली में श्रीधर की रचनाएं डिजिटल पत्र-पत्रिकाओं पर बहु-प्रचलित हैं। ‘अमर उजाला काव्य’ और में उनको नियमित पढ़ा जाता है। वे हिंदी छंद मुक्त कविता और ग़ज़ल विधा में अच्छी पकड़ रखते हैं। रचनाओं में जहाँ भव्य श्रृंगार की सरलता मिलती है वहीं आम आदमी से जुड़ा हुआ जनवाद सामने आता है। शायर जहाँ आशिक़ी और मैकशी की परंपरा में शेर कहता है वहीं घर गाँव गली शहर सड़क दाल- रोटी पर दैनिक जीवन की मुश्क़िलें भी बयाँ करता है। सरल सरस और कम शब्दों में गहन बात कह लेने की शैली इन रचनाओं में मिलती है।