मैं जसकरन सिंह राठौड़ पुत्र श्री मथुरा सिंह राठौड़ मूलतः जिला इटावा के इन्द्रावखी गाँव का रहने वाला हूँ। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बी.ए. और एम.ए. किया तथा ग्वालियर आकर एल.एल.बी. एवं एल.एल.एम. की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के रूप में शासकीय महाविद्यालय के विधि विभाग में नौकरी ११८३ से प्रारंभ की। ग्वालियर के प्रसिद्ध महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज में नौकरी करते हुए जनवरी २०१८ में सेवानिवृत्ति प्राप्त की। इस पुस्तक से पहले मैंने श्रीमद् सरल भागवत् पुराण लिखी है। इस पुस्तक को मैंने भागवत् के १८००० श्लोकों को सरल करके दोहा चौपाई छंदों में लिखा जिससे सामान्य व्यक्ति भी समझ सके। इसके बाद मैंने राधारानी पर भी छंदों में एक पुस्तक लिखी है। श्रीराम कथामृत पुस्तक लिखने के पीछे मेरा आशय यह कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो श्री तुलसीदास जी की रामचरित्र मानस को पढ़कर उसके बहुत से प्रसंग पर कुतर्क करने लगते हैं तथा तुलसीदास जी के आशय को समझ नहीं पाते। मैंने वाल्मीकि रामायण कम्बन रामायण तथा अन्य रामायणों से भी प्रसंग लेकर तथा अन्य पुराणों का हवाला देकर इस पुस्तक को बहुत सरल तरीके से प्रस्तुत किया है। इसको पढ़कर दूसरे पुराणों का प्रसंग भी जगह-जगह प्राप्त हो जायेगा तथा पाठकों के सभी संशय भी दूर हो जायेंगे।