लघु महाकाव्य में महानायक श्री सुंदर लाल जी का संपूर्ण जीवन चरित्र वर्णित है। महानायक के गुणों के अनुरूप आप उदात्त चरित्र तथा धीर-गंभीर स्वभाव के धनी है। सत्य शिव सुंदर की राह पर चलते हुए विषम पारिवारिक परिस्थितियों में भी आप धैर्य रखते हैं। पत्नी का अल्पायु में निधन हो जाता है। छोटे भाई भी पत्नी और बेटी को छोड़कर युवावस्था में ही दिवंगत हो जाते हैं। कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए आप अंत में अपनी भतीजी के पुत्र को इस अनूठे ढंग से दत्तक पुत्र बनाते हैं कि सिवाय प्रेम की पूॅंजी सौंपने के बदले में और कुछ नहीं चाहते।