अर्जित शक्तियों के बल पर मानव के पांव आज चांद पर हैं तो हाथ मंगल पर। वैज्ञानिक युग के अपने प्रतिनिधि महाकाव्य 'श्रीमान मानव की विकास यात्रा' में महाकवि श्री नंदलाल सिंह 'कांतिपति' ने प्रागैतिहासिक ऐतिहासिक सामाजिक एवं वैज्ञानिक सिद्धांतों तथा मान्यताओं का मिश्रण करके अपनी सर्वतोन्मुखी प्रतिभा का परिचय दिया है। सरल भाषा व रोचक प्रस्तुति ने इस महाकाव्य को एक लोकप्रिय पुस्तक बना दिया है। अब इसका द्वितीय संस्करण आपके सामने है।