शुनःशेप कथा है भाग्य की कर्म की एवं करुणा की । यह कथा है एक निर्धन ऋषि पुत्र की जो अपने पिता द्वारा बेच दिया जाता है । उसकी माता तक उसकी रक्षा नहीं करती । हर तरफ से लाचार शुनःशेप अपने ज्ञान एवं कर्म का सहारा लेता है अपनी रक्षा हेतु ।नचिकेता ज्ञान एवं पितृभक्ति की गाथा है जिसमे एक छोटा सा ज्ञानी बालक अपनी ज्ञान पिपासा से न केवल यम देव को प्रभावित कर अपनी जीवन रक्षा करता है अपितु यम से आत्म रहस्य का वो दुर्लभ ज्ञान भी प्राप्त करता है जिससे समस्त संसार वंचित था साथ ही वह अपने पिता के यज्ञफल की रक्षा भी करता है ।
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