लोगों ने योगमुद्रा में बैठे योगियों की उस छवि पर हँसी उड़ाई जो अपनी नाक की नोक पर ध्यान केंद्रित करते थे - जब तक कि स्वामी राम ने एक प्रयोगशाला में जाकर वैज्ञानिकों को यह नहीं दिखाया कि श्वास पर नियंत्रण रखने वाला एक योगी वास्तव में क्या कर सकता है। चकित शोधकर्ताओं के सामने उन्होंने अपनी हृदय गति और मस्तिष्क तरंगों पर पूर्ण नियंत्रण प्रदर्शित किया - ऐसा नियंत्रण जो शरीर-विज्ञान विशेषज्ञ (फ़िजियोलॉजिस्ट) भी नहीं मानते थे कि मनुष्य हासिल कर सकता है। हजारों वर्षों से योग के सिद्ध पुरुष - आंतरिक विज्ञान के मर्मज्ञ - यह दावा करते आए हैं कि श्वास ही शरीर और मन के बीच की मूल कड़ी है जो एक ‘सूक्ष्म शरीर’ को ऊर्जा प्रदान करती है और यही सूक्ष्म शरीर हमारे अस्तित्व के भौतिक और मानसिक पहलुओं को जोड़ता है। इस ऐतिहासिक पुस्तक में स्वामी राम और दो प्रसिद्ध अमेरिकी चिकित्सक भारत के ‘श्वास विज्ञान’ को पूर्वी और पश्चिमी दोनों दृष्टिकोण से समझाते हैं यह बताते हुए कि कैसे यह उपेक्षित विषय शारीरिक स्वास्थ्य और उच्च चेतना के अन्वेषण का आधार हो सकता है। स्वामी राम कुछ बुनियादी श्वास तकनीकों को भी साझा कर रहे हैं जिनका हिमालय के योगी अभ्यास करते हैं ताकि हम इस प्राचीन और शक्तिशाली विज्ञान के साथ तुरंत कार्य शुरू कर सकें।