कीरत बाबाणी गोबिन्द माल्दी तीर्थ बसंत विष्णु भाटिया हरिकान्त और आधुनिक काल के सिंधी लेखकों की कहानियाँ जो इस पुस्तक में सम्मिलित हैं को पढ़ने के बाद यह बात उजागर होती है कि कहानी किसी भी भारतीय भाषा की क्यों न हो उन सब में भारतीय संस्कृति की झलक अवश्य मिलती है। इसी कारण पाठक देश की हर भाषा की कहानी से आसानी से तादात्म्य स्थापित कर लेता है। इस पुस्तक में संकलित कहानियों का चुनाव हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर ने किया है और एक विस्तृत भूमिका भी लिखी है। यह संकलन हिन्दी के पाठकों को सिंधी साहित्य को जानने का अवसर प्रदान करता है।