सिंधु - सुता' डॉ. रंजना वर्मा का नवीन कहानी संग्रह है । इसके पूर्व में उनका कहानी संग्रह 'सूर्यास्त' प्रकाशित हो चुके है तथा सुधी पाठकों द्वारा सराहा जा चुका है । मानव मन विभिन्न अनुभूतियों दृश्यों कथानकों से सदैव प्रभावित होता रहता है । जिस प्रकार उसे प्रेम की कोमल भावनाएं प्रभावित तथा आकर्षित करती हैं उसी प्रकार भय रोमांच जुगुप्सा आदि भाव भी उसके अंतर्मन को प्रभावित करते रहते हैं । उसकी अन्वेषण प्रवृत्ति तथा जिज्ञासा भाव नित नूतन सम्भावनाओं को जन्म देता रहता है । कभी वह भयभीत होता है तो कभी रोमांचित । कभी प्रणय के अथाह सागर में डूब जाना चाहता है तो कभी ममता स्नेह जैसी भावनाएँ उसे स्वयं में समाहित कर लेती हैं । जीवन के विशद चित्रपट पर मानव मन की इन्हीं भावनाओं के रंग लेकर डॉ. रंजना वर्मा ने कल्पनाओं के आधार पर अपने मानस पटल पर शब्दों की तूलिका लेकर अभिव्यक्ति का रंग भरते हुए जो चित्र बनाये हैं वे ही उनकी कहानियों के रूप में सम्मुख आये हैं । 'सिंधु सुता' मानव मन की इन्हीं भावनाओं का शाब्दिक प्रस्तुतिकरण है । इनकी कहानियाँ भिन्न भिन्न परिवेश में भिन्न भिन्न भावभूमि का निर्माण करती हैं तथा पाठक को एक अलग ही लोक में विचरण करने के लिये आमंत्रित करती हैं । उनकी कहानियाँ पाठकों के हृदय पर अमित छाप छोड़ने में सर्वथा सक्षम हैं ।