मोबाइल और डेटा क्रांति के इस युग में जो कोमलताएँ हमसे छूटती गयी हैं उनमें मासूमियत का यह रूप प्रमुखता से शामिल है। इन चिट्ठियों को पढ़ते हुए कभी आप मुस्कराते हैं कभी हैरत से भरते हैं और कभी अ.फसोस भी होता है कि हम चीज़ों को छिन जाने के बाद ही उनकी असली कदर कर पाते हैं। इनमें एक बेलौस ईमानदारी है और इन्हें सच्चाई की स्याही में कलम डुबो कर लिखा गया है। — विमल चंद्र पांडेय