“स्मृतियों के बोल” के द्वारा कवि ने अपने साठ वर्ष के विभिन्न क्षेत्रों के विषयों को कविता के रूप में रखकर जीवंत रूप दिया है। बचपन युवाकाल वृद्धापन में हमारा जीवन-व्यवहार कैसा होता है? गाँव मेला मीत प्रभात व संध्या खेल मछली बिल्ली छुट्टा सांड जैसे रोचक विषयों को इसमें समाहित करने का प्रयास किया गया है।