सामाजिक मानवशास्त्र हिन्दी में मौलिक रूप में लिखा गया एक ऐसा सार्थक प्रयास है जो भारत के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के छात्रों के लिए उपयोगी रहेगा। प्रस्तुत पुस्तक भारतीय जनजातियों के बारे में एक प्रामाणिक दस्तावेज है जो जनजातियों की अवस्था का सम्पूर्ण परिप्रेक्ष्य और विवेचन प्रस्तुत करता है। सामाजिक मानवशास्त्र हिन्दी में लिखी गयी एक अनूठी कृति है जिसमें वास्तविकता की धरती पर मौलिक चिन्तन का बिरवा रोपा गया है। जनजाति विषयों पर हिन्दी में मौलिक लेखन के सीमित भंडार में यह एक मूल्यवान योगदान है।
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