Sona aur Khoon (Bhaag -3)


Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

About The Book

शहादरे में भगियों के चौधरी छुट्टन की बेटी का ब्याह था और उसी दिन उसके यहाँ बारात आपी थी जिस दिन चौधरी रूपराम का काफिला शहादरा आकर पहुँचा संयोग ऐसा हुआ कि छुट्टन मेहतर के यहाँ बारात तो आ पहुँची थी पर भात नहीं आया था। भात आने वाला था हापुड़ ही से। आम दस्तूर था कि जब तक भात न आ जाता था लड़की का ब्याह नहीं हो सकता था। भात लाने का हक लड़]की लड़के के मामा का होता है। भात लाने वाला भातई कहलाता है। वह अमीर हो या गरीव अपनी श्रद्धा के अनुसार भात लाता है। भात यदि लड़की का होता है तो उसमें बिगुए और चूरा हाथी दाँत का होता है-जो सुहाग का जबर्दस्त चिह होता है। लड़के वाले के भात में भातई मौर और जूले लाता है। यह आम दस्तूर है और भात का तथा भातई का महत्त्व हिन्दुओं को विवाह में इतना महत्वपूर्ण होता है कि लड़की की शादी बाप के बिना तो हो सकती है-पर मामा के बिना नहीं हो सकती।
Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
downArrow

Details