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About The Book
Description
Author
इम पर देह के इल्जाम बहुत हैं। इम देह दिखाते हैं हम देह को इस्तेमाल करते हैं उसका पैसा वसूलते हैं । इस तकनीकी चुग में हम देह लेकर आ रहे है । यह अन्याय है नाइंसाफी है हमारे साथ । क्योकिं हमसे ऐसा कहा जा रहा है तो जरा सोच लिया जाय कि हम पर क्या बीत रही होगी ! हम देह दिखाना चाहते हैं या उसका पैसा वसूल रहे है उससे पहले हम अपनी देह को आपकी देह से बचाना चाह रहे है । सारी समस्या तो आपकी देह की है हमारी देह की कोई समस्या नहीं है । किसने देह का आकर्षण दिखाया! आपके कवियों ने आपके गीतकारों ने आपके कहानीकारों ने । क्यों रीझे थे उस पर हैं? सारे व्रत बनाये आपके पक्ष में अपने पक्ष में तो हमने एक भी व्रत नहीं रखा । यह करवाचौथ हमारी वफादारी का लाइसेंस है जो हमें हर साल रिन्यु करमा पड़ता है । हमारे सभ्य पुरुष तो एक-एक पग पर निगाह रखते है कहाँ जा रही है किस-किस से बात की फोन पर किससे हँसी? आपको ये छोटे-छोटे बन्धन लगते होंगे पर हमारी तो साँस रोक देते हैं । हम न तो सती हैं न देती । हम तो औरते है । सती वह है जो जौहर करे या चमत्कार करे । देवी पत्थर में है न चलती है न फिरती है उसे चाहे पूज लो या गंगा में सिरा तो । इसलिए महत्त्व देना बहुत आसान है बराबरी देना बहुत कठिन है । हमें महत्त्व तब दिया गया जब जैसा पुरुष ने चाहा। जहाँ हमने अपनी मर्जी चलायी है हम बदचलन हुए इम वेश्या हुए। परिवार कितना भी बडा क्यो न हो उसकी इज्जत का झंडा हमेशा लड़की औरत की पीठ पर गडा रहता है| बताये गये नियमों से लड़की के जरा-सा इधर-उधर होने से इज्जत चली जाती है | मैं पूछती हूँ कि इज्जत इतनी कच्ची क्यों है? -मैत्रेयी पुष्पा.