सुबह'' एक ऐसी कहानी है जो ज़मींदार परिवार में जन्मी ''वसुधा'' के इर्द-गिर्द घूमती है। जहां उसके पिता ज़मीदार सोमनाथ उसकी जिंदगी का एक अहम फैसला करते हैं और जिसे वसुधा न चाहकर भी स्वीकार करती है। उस फैसले से वसुधा की आगे की ज़िंदगी में कुछ ऐसे हालात पैदा होते हैं जिससे उसके जीवन में आए एकाकीपन से वसुधा की जिंदगी एक नया मोड़ लेती है और वह कलम का दामन थामती है। और यहीं से जन्म होता है एक नई वसुधा का। वह आगे बढ़ती जाती है और अपने जीवन में छाए अंधकार को चीरते हुए एक अनापेक्षित मुकाम पर पहुंच जाती है। क्या वसुधा के जीवन में प्रभात की पहली किरण के साथ ही एक नई ''सुबह'' का आगमन होगा?
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