‘सुभाष-एमिली : अधूरे प्रेम की पूरी कहानी’ केवल एक प्रेम-कथा नहीं बल्कि इतिहास के उस गूढ़ अध्याय का दस्तावेज़ है जिसे सुभाष चंद्र बोस ने अपने रक्त साहस और संवेदना से रचा। यह पुस्तक हमें उस पड़ाव पर ले जाती है जहाँ एक भारतीय क्रांतिकारी और एक ऑस्ट्रियन युवती के बीच युद्ध और निर्वासन की आग के बीच प्रेम अंकुरित होता है और उसे वही गरिमा मिलती है जिसकी वह अधिकारी थी।यह कहानी सिर्फ़ सुभाष और एमिली तक सीमित नहीं। जब यह सच्चाई उजागर हुई तब देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने व्यक्तिगत पहल से न केवल एमिली शेंकल को नेताजी की पत्नी और अनिता को उनकी पुत्री के रूप में सार्वजनिक मान्यता दिलाई बल्कि उन्हें आजीवन गरिमापूर्ण सहायता भी सुनिश्चित की। यह पुस्तक पं. नेहरू के उस पहलू को भी दर्शाती है जो वैचारिक असहमतियों के बावजूद निजी पीड़ा को सम्मानपूर्वक स्वीकारना जानते थे।यह एक विरल दस्तावेज़ है-जहाँ रूमानी प्रेम राष्ट्रीय कर्तव्य और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सूत्र एक साथ जुड़ते हैं। अगर आप इतिहास के भीतर छुपे इंसान को खोजना चाहते हैं तो यह पुस्तक आपके लिए है।