सूफी वैज्ञानिक कहे जाने वाले जगदीश चंद्र बोस को भारत में आधुनिक विज्ञान के पिता का दर्जा हासिल है। वह अपने जीवन काल में कम से कम दो बार नोबेल पुरस्कार जीतने के करीब आए। बोस के वैज्ञानिक शोध का विस्तार माइक्रोवेव्स से लेकर पादप विज्ञान तक था। वह अमेरिकी पेटेंट प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे। वह 19वीं सदी में विषयों को एक दूसरे से अलग करती ऊँची दीवारों को ढहाकर पादप-तंत्रिका विज्ञान जैसे विषयों की शुरुआत करने वाले लोगों में से एक थे। बोस ने भारतीय भाषाओं की पहली साइंस-फ़िक्शन कहानी लिखी। यह जीवनी उनके महानतम बनने के सफर को रेखांकित करती है।