“सुकून-ए-दिल” में ज़िंदगी के हर पहलू को विनय जी ने बड़ी बारीकी से छुआ है। उनकी क़लम से निकले अल्फ़ाज नए अंदाज़़ में आहिस्ते-आहिस्ते दिल में समाते चले जाते हैं। - प्राणेन्द्र नाथ मिश्र--विनय कुमार जी मूलतः इलाहाबाद के रहने वाले हैं और आजकल गुड़गाँव में रहते हैं। एम एन आई टी इलाहाबाद से १९७९ में मेकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद ४२ साल तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कम्पनियों एन टी पी सी क्रुप इंडिया एल एण्ड टी एवं एनरगो में कार्यरत रहे। आज कल वो हारग्रीव्स माइनिंग इंडिया गुड़गाँव में निदेशक के पद पर कार्य रत हैं। विनय जी की एक पुस्तक जिसका शीर्षक- “दिल की आवाज़” है जुलाई २०२१ में और दूसरी पुस्तक जिसका शीर्षक-“दिल के अल्फ़ाज़” है दिसंबर २०२१ में प्रकाशित हुई है जो उनकी नज़्मों और ग़ज़लों का संग्रह है। विनय जी काव्य कला मंच के उपाध्यक्ष भी हैं।
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