सुर हमारी चेतना के शीर्षक से प्रकाशित प्रतिनिधि गीतों के रचनाकार भाई डॉक्टर जयप्रकाश मिश्र उन श्रेष्ठ व्यक्तित्वों में कनिष्टका अधिष्ठित हैं। जो पहली भेंट में ही अपनी अदभुत छाप छोड़ते हैं जिनमें सहजता स्नेह सरलता बंधुत्व और वात्सल्य की अनेक धाराएं लहराती रहती हैं। बड़प्पन की कृत्रिमता और असहज मौन के विपरीत खुलापन और परस्पर संवाद का सात्विक सिलसिला ही गीत और रचनाकार की पृष्ठभूमि है।