“स्वप्निल हकीकत” यानि की स्वप्न सा सच और मेरा यह स्वप्न कब मेरी माँ का स्वप्न बन गया पता ही नहीं चला| कविता लेखन से लेकर प्रकाशन तकमेरी माँ हर पल मेरी मार्गदर्शक के तरह मेरे साथ खड़ी रही | मैं आज जीवन में जो कुछ भी हूँ और आज आप सबके साथ कुछ भी बाँट पा रही हूँ तो उसका श्रेय मेरे जीवन में मौजूद दो महत्वपूर्ण लोगों को जाता है एक मेरी माँ और दूसरा मेरा भाई “गौरव” | हम सब सपने देखते हैं और हमारे सफ़र में कई जाने पहचाने चेहरे हमारे उस सफ़र के हिस्सा बन जाते हैं और कई बार अभिन्न अंग भी | इस माध्यम के द्वारा मैं अपने सभी शुभ-चिंतकों और दोस्तों का धन्यवाद करना चाहूंगी जिन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया |