Taale Mein Shehar ? ???? ??? ???
Hindi


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About The Book

पूरे शहर पर ताला था। बहुत भारी अदृश्य ताला! क्या सिर्फ़ शहर पर? या इंसानी रिश्तों पर? भावनाओं मानव-मूल्यों रूढ़िवादी हदों को लाँघने की कोशिश या अभिव्यक्ति पर? या फिर ज़िंदगी जीने और शायद इज़्ज़त के साथ अपनी मौत मरने पर! लगभग सौ साल पहले अँग्रेज़ों की हुकूमत के दौरान 1918 से 1920 तक के बीच स्पैनिश फ़्लू पैंडेमिक के नाम से लगा यह ताला क्या अंततः रोक पाया था इंसानी जज़्बे को खुलकर साँस लेने की तमन्ना को या कहें कि ज़िंदगी को? सिर्फ़ एक शख़्स की नहीं पूरे शहर की ज़िंदगी को! अलग-अलग विषयों पर रचनात्मक इत्मीनान के साथ लिखी इस संग्रह की पाँचों कहानियाँ एक आवाज़ में यही कहती दिखाई देती हैं कि कौन-सा ताला रोक पाता है खुले आसमान में पंख फैलाकर उड़ने के उत्साह को आज़ाद साँसें भरने की जद्दोजहद को! हज़्मी तालों की चाबियाँ भी आख़िर होती ही हैं। हिम्मत की चाबी!
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