तब और अब उपन्यास में लेखक की दृष्टि हमारी दो पीढ़ियों पर टिकी है। एक पिछली पीढ़ी जिसके अपने कुछ गुण कुछ संस्कार थे जो उन्हें जोखिम उठाकर भी थामे रहती थी और दूसरी आज की पीढ़ी जो बदली हुई परिस्थिति में घिरी हुई है और अपना संतुलन खो रही है। अनेक घटनाओं और पात्रों के ज़रिए लेखक ने हमारे समय का एक यथार्थ किंतु पूर्ण चित्र खींच दिया है।