इंसान की गुम हो गई इंसानियत की पड़ताल करता रामेंद्र कुशवाहा का नया कथा संग्रह तलाश अपनी क्षुद्रता में सिमटे समाज का यथार्थ दर्शाता है। संग्रह में संकलित सभी कहानियां तेजी से बढ़ते उपभोक्तावाद पर करारी चोट करती दिखती हैं। बेवजह अपनी आवश्यकताओं के मकड़जाल में उलझा इंसान विद्रूपताओं का शिकार हुआ जाता है।
Piracy-free
Assured Quality
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.