Tantra Kaumudi - Tantrik Shatkarm evam Ras Vigyan Goodh Rahasya Khand

About The Book

स्वर्गीय श्री आरिफ़ निखिल (मुख्य लेखक)तांत्रिक षट्कर्म यह तंत्र क्षेत्र की एक ऐसी विधा है जिसमें सम्मोहन आकर्षण उच्चाटन स्तंभन एवं शांति कर्म आदि सम्मिलित हैं जो जीवन को उच्चता देने में अतिसहयोगी है पर यह भी सत्य है कि इसका सदुपयोग और दुरुप्रयोग दोनों हुआ है और दुरुप्रयोग के कारण जनसामान्य के मन में इस विद्या के प्रति एक आक्रोश सा है एक भय मिश्रित भावना है और हेय दृष्टि से इसको देखने की भावना भी । कुछ अर्थों में समाज का इस ओर ऐसा देखा जाना भी उचित था क्योंकि इन क्रियाओं के नाम पर जिस प्रकार के वातावरण की रचना व्यक्ति के सामने होती है और जिस तरह असामाजिक और निंदनीय कार्य करने वाले और कुत्सित मानसिकता वाले लोगों ने इस विद्या का प्रयोग अपनी कुत्सित मानसिकता को पूर्ण करने के लिए किया । परिणाम स्वरूप लोगों में एक प्रकार का भय का संचार हो गया । इस कारण यह विद्या मानो मैली विद्या या क्रिया में बदल गई। सदगुरुदेव डॉ नारायण दत्त श्री माली जी को यदि साक्षात तंत्रेश्वर कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । क्योंकि तंत्र का ज्ञान बिना सदगुरुदेव के संभव ही नही। और उनके बिना इस आसाधारण क्षेत्र में कोई गति संभव नहीं । बात बात में गाली देने वाले तरह तरह के नशे में चूर व्यक्ति मारन मोहन वशीकरण बिना सोचे विचारे कर देने को अपना अधिकार समझते हैं। किंतु जब इसकी कीमत चुकानी पड़े तब ? सदगुरुदेव श्रीमाली जी ने एक ऐसे साधन की कल्पना की है जो अपने दैनिक जीवन की आवश्यकता को पूरी करे साथ ही साथ शिष्ट और शालीन भी हो और जब एक साधक की आवश्यकता हो तब वह एक साधक हो जाए । सदगुरुदेव ने जो इन षट्कर्म को एक नया ही स्वरूप हम सभी के सामने रखा तो एक ओर जहां इन प्रयोगों का लाभ होगा वहीं गुरु गुरु साधना का भी लाभ मिलेगा। और जब ऐसे अद्भुत विधान के लिए थोड़ा सा कष्ट उठाना पड़े तो वह भी स्वीकार्य है। यह पुस्तक अनेकों गोपनीय सूत्र और साधना में सफलता का साहित्य समेटे हुए है। क्योंकि गोपनीय गुरु परम्परा से प्राप्त सूत्रों को एक स्थान पर इस तरह एकत्रित करना बहुत श्रम साध्य कार्य है। साधकों को सदगुरुदेव के आशीर्वाद से दुर्लभ सूत्र प्राप्त हो जो कि अपने आप में विलक्षण हो और उसे मनोवांछित सफलता दिलाने में सहयोगी भी हो । वहीं रस शास्त्र तो जीवन की सर्वोच्चता है आज रस शास्त्रीय हैं कहां ? और जो हैं भी तो वह गोपनीयता के सिद्धांत का पालन करने वाले हैं। इस शास्त्र के गोपनीय रहस्यों को समझना और उन्हें पाना भी किसी सौभाग्य से कम नहीं है। NPRU और तंत्र कौमुदी की ओर से प्रस्तुत ग्रन्थ इसी कमी को पूरा करने का एक ठोस प्रयास है।
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