तपती दोपहरी अभिमन्यु अनत का एक अतयंत हृयस्पर्शी उपन्यास है जिसमें मारिशस के एक निर्धन हिंदू-परिवार की रुला देने वाली कहानी दी गई है इसमें इस द्वीप के शोषितों की दर्द भरी ज़िंदगियों की जीती-जागती तस्वीर पेश की गई है। अनुभूति की तीव्रता और रोचकता की दृष्टि से यह उपन्यास बेजोड़ है। इसमें अपने आस-पास के माहौल से लाचार व्यक्ति के भीतर उठती आँधी का मनोवैज्ञानिक चित्रण बड़े ही सधे ढंग से किया गया है। अध्यापन संपादन और लेखन से एक साथ जुडे अभिमन्यु अनत रंगमंच से भी संबद्ध रहे हैं और अवकाश के क्षणों में पेंटिंग्स बनाने का भी शौक रखते हैं। इसीलिए उनकी इस कृति में जीवन के तमाम रंगों की झलक एक साथ दिखाई पड़ती है।